VARDAAN LEARNING INSTITUTE | POWERED BY VARDAAN COMET

तोप (वीरेन डंगवाल)

CBSE Class 10 Hindi (Course B) • Sparsh Part-2 • Poetry (Kavya Khand)

कवि: वीरेन डंगवाल (Viren Dangwal)

वीरेन डंगवाल हिंदी की आधुनिक कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। इनकी कविताओं में आम आदमी के जीवन की छोटी-बड़ी ख़ुशियों, दुखों, और संघर्षों का बहुत ही सीधा और 'यथार्थवादी' (Realistic) चित्रण मिलता है। इस 'तोप' कविता में उन्होंने आज़ादी की लड़ाई (1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) की एक पुरानी और खूंखार तोप का वर्णन किया है, जो आज केवल एक 'खिलौना' या 'दिखावे की वस्तु' (Showpiece) बनकर रह गई है।

कविता का मूल भाव (Theme/Core Message):

कविता 'तोप' हमें यह संदेश देती है कि इस दुनिया में अत्याचार, ताकत या निरंकुश सत्ता (Dictatorship) हमेशा के लिए नहीं रहती। एक समय ऐसा आता है जब बड़े-से-बड़े जालिम और शक्तिशाली हथियार का घमंड भी टूट जाता है और उसका मुँह बंद हो जाता है। 1857 में जिस 'तोप' ने अनेक वीर क्रांतिकारियों की जान ली (धज्जियाँ उड़ाईं) और जिसका बड़ा आतंक था, आज समय बदलने पर (आज़ादी के बाद) वह बिलकुल शांत (चुप) पड़ी है। अब वह सिर्फ एक ऐतिहासिक 'विरासत' (Heritage) बनकर कंपनी बाग़ के द्वार पर रखी हुई है। यह कविता हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमें अपने अतीतों की गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए।

पद 1: विरासत के रूप में सँभाल कर रखी गई तोप

यह कंपनी बाग़ के मुहाने पर
धर रखी गई है यह 1857 की तोप
इसकी होती है बड़ी सँभाल, धरी गई है
विरासत में मिले
कंपनी बाग़ की तरह
साल में चमकाई जाती है दो बार।

शब्दार्थ: कंपनी बाग़ = ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनवाया गया बाग़ (पार्क), मुहाने पर = प्रवेश द्वार/गेट पर (At the Entrance), सँभाल = देखभाल/सुरक्षा (Maintenance), विरासत = जो हमें पूर्वजों से मिले (Heritage)।

भावार्थ: कवि 'वीरेन डंगवाल' कानपुर के 'कंपनी बाग़' के मुख्य प्रवेश द्वार (Gate) पर रखी हुई सन 1857 की एक बहुत ही पुरानी तोप को देखकर कहते हैं:
यह वह तोप है जिसका प्रयोग अंग्रेजों ने सन '1857 ई.' (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) में अनेक भारतीय सैनिकों और क्रांतिकारियों को मारने के लिए किया था। आज आज़ाद भारत में इस तोप की बहुत अधिक 'देखभाल या सँभाल' की जाती है।
जिस प्रकार अंग्रेज़ों द्वारा बनवाया गया यह 'कंपनी बाग़' (Company Bagh) हमें 'विरासत' (Heritage) के रूप में अंग्रेजों से मिला है, ठीक उसी प्रकार यह तोप भी हमें एक 'विरासत' के रूप में ही मिली है। इसलिए, साल में मुख्य रूप से दो बार (26 जनवरी-गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त-स्वतंत्रता दिवस) इसे अच्छी तरह से साफ़ करके 'चमकाया' जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसे देख सकें।

पद 2: तोप का खूंखार इतिहास

सुबह और शाम कंपनी बाग़ में आते हैं बहुत-से सैलानी
उन्हें बताती है यह तोप
कि मैं बड़ी ज़बर,
उड़ा दिए थे मैंने
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे
अपने ज़माने में।

शब्दार्थ: सैलानी = घूमने आने वाले यात्री (Tourists), ज़बर = बड़ी शक्तिशाली/ताकतवर (Powerful/Fierce), सूरमाओं के = बहुत बड़े शूरवीरों के/बहादुरों के (Great Warriors), धज्जे = चीथड़े/धज्जियाँ उड़ा देना (Blew into pieces/destroyed)।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि इस कंपनी बाग़ (पार्क) में सैर करने के लिए सुबह और शाम बहुत सारे यात्री/सैलानी (Tourists) घूमने के लिए आते हैं।
जब वे सैलानी इस तोप के पास आकर इसे देखते हैं, तो यह तोप मानो (अपने मौन रूप में) उन्हें अपना इतिहास और अपना 'भयानक अतीत' बताती है। वह तोप कहती है कि:
"मैं (अपने ज़माने में) बहुत ही शक्तिशाली और खूंखार (ज़बर) हुआ करती थी। मैंने सन 1857 की लड़ाई में न जाने कितने महान और वीर भारतीय 'शूरवीरों' (सूरमाओं) की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।"
(अर्थात, इस तोप ने अपने समय में बहुत आतंक और तबाही मचाई थी और कई आज़ादी के दीवानों को मौत के घाट उतार दिया था)।

पद 3: वर्तमान स्थिति (बदला हुआ समय और निरंकुशता का अंत)

अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप
कभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं
ख़ासकर गौरैयें
वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।

शब्दार्थ: बहरहाल = वर्तमान समय में (At Present/Anyway), फ़ारिग = आज़ाद/खाली (Free), गपशप = बातचीत/चहचहाना (Chattering), भीतर = अंदर, गौरैयें = छोटी चिड़िया (Sparrows)।

भावार्थ: कवि बताते हैं कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। 'आज' (वर्तमान आज़ाद भारत में) इस तोप का वह पुराना 'आतंक' (डर) ख़त्म हो चुका है।
अब यह तोप केवल छोटे बच्चों का 'खिलौना' (Toy) बनकर रह गई है। बच्चे इस पर बैठकर 'घुड़सवारी' (Horse-riding) का खेल खेलते हैं। जब बच्चे इस पर से उतरकर चले जाते हैं (जब तोप फ़ारिग/खाली होती है), तो चिड़िया (Birds) इसके ऊपर बैठकर आपस में बेख़ौफ़ होकर 'गपशप' (बातचीत/चहचहाना) करती हैं।
इतना ही नहीं, कभी-कभी वे नन्हीं और प्यारी 'गौरैया' नाम की चिड़िया (Sparrows) शैतानी करते हुए तोप के 'भीतर' (गोला निकलने वाले मुँह में) भी निडर होकर घुस जाती हैं
यह सब देखकर कवि एक बहुत बड़ा संदेश देते हैं—वे चिड़िया और बच्चे (अपने इस बेख़ौफ़ रवैये से) हमें यह बताते हैं कि इस दुनिया में "तोप (या हथियार/तानाशाही) कितनी भी बड़ी और शक्तिशाली (ज़बर) क्यों न हो, एक-न-एक दिन उसका मुँह हमेशा के लिए बंद हो ही जाता है।" (अर्थात, अत्याचार और तानाशाही का अंत निश्चित है)।

BOARD EXAM QUESTIONS

प्रश्न 1: 'विरासत' क्या होती है? 'तोप' को विरासत के रूप में क्यों सँभाल कर रखा गया है और इसे साल में कितनी बार चमकाया जाता है?

उत्तर: 'विरासत' (Heritage) उन पुरानी और ऐतिहासिक वस्तुओं, स्मारकों या ज्ञान को कहते हैं जो हमें हमारे 'पूर्वजों' (पीढ़ियों) से मिलते हैं।
कंपनी बाग़ में रखी हुई तोप को विरासत के रूप में सँभाल कर इसलिए रखा गया है ताकि हमारी आने वाली 'नई पीढ़ी' भारत के स्वतंत्रता संग्राम (आज़ादी की लड़ाई) के इतिहास को जान सके और यह याद रख सके कि अंग्रेजों ने भारतीयों पर कैसे अत्याचार किए थे। इस तोप को साल में मुख्य रूप से दो बार (15 अगस्त-स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी-गणतंत्र दिवस) विशेष रूप से चमकाया (साफ़) जाता है।


प्रश्न 2: "मैंने अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे उड़ा दिए थे।" - यह कथन किसका है और यह किस घटना की ओर संकेत करता है?

उत्तर: यह कथन कानपुर के 'कंपनी बाग़' में रखी सन 1857 की पुरानी 'तोप' का है, जो अब शांत खड़ी है।
यह कथन उस 'भयानक घटना' की ओर संकेत करता है जब 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी सेना ने इस तोप का इस्तेमाल करके भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाले महान और बहादुर 'क्रांतिकारियों' (सूरमाओं) को बुरी तरह से कुचल दिया था और उनके शरीर के चिथड़े (धज्जियां) उड़ा दिए थे। यह उस तोप के अत्यंत खूंखार और भयानक रूप को दर्शाता है।


प्रश्न 3: तोप का वर्तमान में क्या हाल है? उस पर अब बच्चे और चिड़िया क्या करते हैं?

उत्तर: 'वर्तमान समय' में उस तोप का आतंक और डर एकदम समाप्त हो चुका है। अब वह अपने पुराने खूंखार रूप में नहीं है, बल्कि एक 'दिखावे की वस्तु' (Showpiece) और बच्चों का खिलौना बनकर रह गई है।
- बच्चे: छोटे-छोटे बच्चे बिल्कुल बेख़ौफ़ होकर (बिना डरे) इस तोप के ऊपर बैठकर घुड़सवारी (Horse riding) का खेल खेलते हैं।
- चिड़िया: जब तोप खाली होती है, तो उस पर बैठकर गौरैया (छोटी चिड़िया) आपस में गपशप (बातें/चहचहाहट) करती हैं और कभी-कभी वे तोप के अंदर की नली (मुँह) में भी घुसकर खेलती हैं।


प्रश्न 4: "कितनी भी बड़ी हो तोप, एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद" - कविता की इस अंतिम पंक्ति के माध्यम से कवि क्या संदेश (Message) देना चाहता है?

उत्तर: कविता 'तोप' की अंतिम पंक्तियों के माध्यम से कवि 'वीरेन डंगवाल' यह बहुत गहरा और सत्य संदेश (Universal Truth) देते हैं कि:
इस दुनिया में कोई भी 'अत्याचारी ताक़त', 'तानाशाही' (Dictatorship) या 'हथियार' हमेशा के लिए जीवित या अजेय नहीं रहता।
समय बहुत बलवान होता है। एक ऐसा दिन ज़रूर आता है जब बड़े-से-बड़े घमंडी जालिम और खूंखार हथियार का भी 'अंत' हो जाता है और 'उसका मुँह हमेशा के लिए बंद' (शांत) हो जाता है। (अर्थात, बुराई का अंत और सच्चाई व आज़ादी की जीत निश्चित है)।